दोस्तो ! मैं वर्डप्रैस छोड़ रहा हूं । अब आप मुझसे फ़ेसबुक, http://www.moinshamsi.blogspot.com और http://www.openbooksonline.com/profile/moinshamsi पर मिल सकते हैं ।
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अभिलेख
दोस्तो ! मैं वर्डप्रैस छोड़ रहा हूं । अब आप मुझसे फ़ेसबुक, http://www.moinshamsi.blogspot.com और http://www.openbooksonline.com/profile/moinshamsi पर मिल सकते हैं ।
Friends !
जैसा कि आप जानते ही हैं, आजकल एक और विडियो-फ़िल्म बनाने की तैयारियों में लगा हूं । स्क्रिप्ट तैयार है । कास्टिंग शुरू कर दी हैं ।
कुछ फ़िल्में पहले भी बनाई हैं, मगर इस बार मामला ज़रा डिफ़रेंट है । पहले वाली फ़िल्में शार्ट-फ़िल्में थीं, उनमें गाने नहीं थे, सब्जेक्ट सीरियस थे और उन्हें बनाने में खर्च उतना हुआ था जितना हमारा ग्रुप बर्दाश्त कर सकता था ।
मगर अब, फ़िल्म की लम्बाई एक घन्टे से अधिक है, दो-तीन गाने हैं, सब्जेक्ट “कामेडी” है, और खर्च पहले से ज़्यादा है । इसलिये इसे कन्ट्रीब्यूशन-बेसिस पर बनाना चाहता हूं । यानि कि इसमें काम करने वाले सभी आर्टिस्ट थोड़ा-थोड़ा पैसा देंगे और उस पैसे से फ़िल्म बन जायेगी । फिर मेरी कोशिश ये होगी कि फ़िल्म ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे ।
हालाँकि ये फ़न्डा कुछ लोगों को अजीब सा लगेगा, और कुछ लोग नाक-भौं भी सिकोड़ेंगे । मगर मुझे ऐसे लोगों की परवाह नहीं है । ये वो लोग होते हैं जो खुद तो कुछ उखाड़ कर इकट्ठा नहीं कर पाते, और दूसरों की बेकार में ही आलोचना करते हैं । मुझे तो ऐसे लोगों को साथ लेना है जो खुद को टैलेण्टेड मानते हों, कुछ करके दिखाना चाहते हों, और अपने शौक़ को पूरा करने के लिये थोड़ा सा पैसा भी खर्च कर सकें (चाहे वो एकदम नये हों और किसी भी उम्र के हों) ।
मैं प्रफ़ेशनल मेकर नहीं हूं । सेट-अप भी बड़ा नहीं है । कोई तड़क-भड़क, दिखावा भी नहीं है । मगर साथ ही, धोखा और exploitation भी नहीं है मेरे यहां । मेरे पुराने आर्टिस्ट जानते हैं कि जब हम काम करते हैं तो काम ही करते हैं, फ़ालतू बातों और बेकार के चक्करों का अपने यहां सवाल ही नहीं उठता । मेरे साथ जो लोग जुड़ते हैं वो काफ़ी कुछ सीखते हैं । और अगर उनमें दम होता है तो फिर आगे उनको हमारे ग्रुप की तरफ़ से हमेशा सपोर्ट मिलता रहता है ।
खैर, ये तो बाद की बातें हैं । अभी तो बस आर्टिस्ट जोड़ने हैं और काम करना है । लिहाज़ा आप लोगों से इतना फ़ेवर चाहूंगा कि इस सन्देश को ज़्यादा से ज़्यादा आगे बढ़ायें और मेरी कोशिश को सफल बनाने मे सहयोग करें ।
इस फ़िल्म के लिये ऐक्टर्स (हर उम्र के मेल्स, फ़िमेल्स, बच्चे), सिंगर्स, म्युज़ीशियंस, स्पान्सर्स, को-प्रोडयूसर्स, ऐडवर्टाइज़र्स…. सबका स्वागत है ।
और ज़्यादा जानकारी के लिये हमसे kimuzacreations@gmail.com और 9999863456 पर कान्टेक्ट किया जा सकता है ।
नोट- नये और अनुभवहीन कलाकारों को बिना किसी फ़ीस के ट्रेनिंग दी जायेगी ।
ऐसे लोगों का सबसे पहले स्वागत है जिनके अन्दर ऐक्टिंग का कीड़ा बरसों से कुलबुला रहा है, मगर वो शर्म, झिझक और “लोग क्या कहेंगे” टाइप चीज़ों के कारण अपने अन्दर की आग को सीने में दबाये बैठे हैं और उम्र गुज़ारते जा रहे हैं । उठ खड़े होइये हुज़ूर । दिखा दीजिये दुनिया को कि आप क्या कर सकते हैं । हम आपके साथ हैं ।
अपने टैलेन्टेड स्टूडेन्ट्स की लगातार गुज़ारिश से इन्स्पायर्ड होकर एक बार फिर मैंने एक फ़िल्म बनाने का इरादा किया है । ये एक कॉमेडी फ़िल्म होगी जिसमें गीत-संगीत भी होगा और हल्का-फुल्का मैसिज भी । बजट छोटा ही है क्योंकि हम लोग अपने पैसे पर अपना शौक़ पूरा करते हैं । पैसा कमाना ना कभी हमारा उद्देश्य रहा है, और ना कभी पैसा कमाया है इस सब से । उद्देश्य होता है छुपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना और आत्म-सन्तुष्टि हासिल करना । हर आयु का व्यक्ति हमें ज्वाइन कर सकता है । दुआ करें कि हम अपने उद्देश्य में सफल हों । (आमीन) ।
दोस्तो !
अगर आप मेरी आवाज़ में कुछ गीत सुनना चाहें तो नीचे दिये गये लिंक्स पर क्लिक करें:
तेरी दुनिया से
http://www.hotshare.net/audio/247718-14162971cb.html
एक लड़की को
http://www.hotshare.net/audio/247726-41699994bf.html
दिलबर मेरे
http://www.hotshare.net/audio/247733-8382449af2.html
याद आ रही है
http://www.hotshare.net/audio/247737-1849198820.html
mana janab ne
http://www.hotshare.net/audio/251241-46611661b6.html
TERE JAISA YAAR
http://www.hotshare.net/audio/251242-927239021d.html
मैं फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी हूं । चाहें तो तशरीफ़ लायें ।
LISTEN THE SONG “TERI DUNIA SE DOOR…” IN MY VOICE, AND LET ME KNOW HOW BESURAA I AM. The song can be downloaded from here:
http://www.hotshare.net/audio/247718-14162971cb.html
(सुनिये मेरी आवाज़ में, किशोर दा का सदाबहार गीत “तेरी दुनिया से….”, और मुझे बताइये कि क्या आप मुझे झेल पाये ? डाउनलोड-लिंक ये है):
http://www.hotshare.net/audio/247718-14162971cb.html
दिल्ली में मैंने एक बड़ी अजीब बात नोट की है । यहाँ लोग टीचर्स को बड़ा हेय समझते हैं । और सरकारी स्कूल्स के टीचर्स से तो इनका जनम-जनम का बैर है । सरकारी स्कूल-टीचर्स इन्हें फूटी आँख नहीं सुहाते । उन्हें लगता है कि वो मुफ़्त की सेलरी ले रहे हैं, आधे दिन की नौकरी करते हैं, उसपर भी काम नहीं करते, मई-जून में फ़ुल छुट्टी मारते हैं… वग़ैरा…वग़ैरा….। कई लोग तो यहां तक कहते हैं कि वे (अर्थात टीचर्स) हराम की खाते हैं । (यानि कि दूसरे शब्दों में वे उन्हें “हरामखोर” कह रहे होते हैं) । सभी तरह के बे-ईमान, रिश्वतखोर, मुनाफ़ाखोर, लालची, चोर, धूर्त, लम्पट, मक्कार, कामचोर और मिलावटखोर लोग अपने गिरेबान में नहीं झाँकते और एक मत से बेचारे टीचर को खलनायक मानते हैं । लेकिन मज़े की बात ये है कि यही लोग जब अपने लिये, या अपने बेटे या भाई आदि के लिये रिश्ता ढूँढते हैं तो पहली प्राथमिकता ऐसी लड़की को देते हैं जो सरकारी स्कूल की टीचर हो (यानि कि उनकी परिभाषा के अनुसार “ह………” हो), जो आधे दिन तो नौकरी करके नोट कमा कर लाये, और बाक़ी आधे दिन घर संभाले । वाह रे दोग़ली मानसिकता ।
(मैं जानता हूं अब कुछ मित्र मुझसे सवाल करेंगे कि “क्या आप टीचर हैं?”)
कहते हैं जो जैसा करता है, वैसा ही भरता है । तो… गुस्ताख़ी माफ़ हो…… जिन बुज़ुर्गों के साथ उनकी सगी औलादें बुरा बर्ताव करती हैं, क्या उन बुज़ुर्गों ने भी अपने बड़ों के साथ वैसा ही बर्ताव किया था, जिसकी वो सज़ा पा रहे हैं…?
आजकल कुछ मर्द चोटी रख रहे हैं… लड़कियों की तरह…! कान में बाली पहन रहे हैं…! ब्यूटीपार्लर तो पहले से ही जाने लगे थे….! क्या जल्दी ही साड़ियाँ भी पहनने लगेंगे?